Saturday, 19 September 2015

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में 23 ऐसे तथ्य जो हर भारतीय को जानने चाहिए


नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में 23 ऐसे तथ्य जो हर भारतीय को जानने चाहिए

  • कहते हैं कि जो पीढ़ी उसके पुरखों और इतिहास को भूल जाती है उससे अधिक अभागा कोई नहीं हो सकता. यदि कोई देश उसकी पुरातन संस्कृति, अतीत और देश की आज़ादी के लिए उनके लहू की कुर्बानी देने वाले लड़ाकों को भूल जाता है तो इससे बड़ी विडम्बना क्या हो सकती है? वर्तमान समाज को इस बात पर गहन चिंतन-मनन करना चाहिए कि आख़िर हम क्यों अपने पुरातन नायकों को भुलाते जा रहे हैं.
    अब आप सभी सोच रहे होंगे कि ऐसी क्या ज़रूरत पड़ गई कि हमने मौसम-बेमौसम ही देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का राग अलापना शुरु कर दिया. दरअसल बात कुछ ऐसी है कि इधर पिछले कई दिनों से भारत के सबसे ज़्यादा प्रचलित अख़बार टाइम्स ऑफ इंडिया ने कई किश्तों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर फीचर स्टोरी करना प्लान किया है, इसकी पहली किश्त छप भी चुकी है. इस स्टोरी में वे “नेताजी” के विवादास्पद मौत और उसके बाद की कहानी की जांच-पड़ताल में लगे दिखते हैं, और वे इससे हमारे जैसे सामान्य जनों में एक सहज उत्सुकता और ऊर्जा का संचार करते प्रतीत होते हैं. तो इसी के मद्देनज़र ग़ज़बपोस्ट भी उसके पाठकों के लिए लेकर आया है “नेताजी” की ज़िंदगी से जुड़े ऐसे कुछ तथ्यों को जो हममें से अधिकतर को नहीं मालूम होंगे...
    1. उन दिनों गवर्नर जनरल से मुलाक़ात करने के दौरान छाते को साथ ले जाना वर्जित था, मगर भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के बाद उन्होंने ऐसे किसी भी फरमान को मानने से इंकार कर दिया.
    2. नेताजी ने आज़ादी के संग्राम में शामिल होने के लिए भारतीय सिविल सेवा की आरामदेह नौकरी ठुकरा दी.
    3. सन् 1921 से 1941 के बीच नेताजी को भारत के अलग-अलग जेलों में 11 बार कैद में रखा गया.
    4. सन् 1941 में उन्हें एक घर में नज़रबंद करके रखा गया था, जहां से वे भाग निकले. नेताजी कार के माध्यम से कोलकाता से गोमो के लिए निकल पड़े. वहां से वे ट्रेन से पेशावर के लिए चल पड़े. वहां से वे काबुल और फिर काबुल से जर्मनी को चल पड़े जहां वे अडॉल्फ हिटलर से मिले.
    5. सन् 1943 में जब नेताजी बर्लिन में थे, उन्होंने वहां आज़ाद हिंद रेडियो और फ्री इंडिया सेंटर की स्थापना की थी.
    6. सन् 1943 के जनवरी माह में जापानवासियों ने नेताजी को पूर्वी एशिया में भारतीय राष्ट्रप्रेमियों की अगुआई के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने यह आमंत्रण स्वीकारा और 8 फरवरी को जर्मनी से जापान को रवाना हो गए.
    7. नेताजी जर्मनी से जापान वाया मैडागास्कर सबमैरिन के सहारे यात्रा करते रहे. उन दिनों इस तरह की और इतनी लंबी यात्रा में बड़े खतरे हुआ करते थे.
    8. नेताजी सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी की कई बातों और विचारों से इत्तेफाक़ नहीं रखते थे, और इस पर उनका मानना था कि बिना किसी प्रकार के हिंसक कार्यक्रंम के भारत को आज़ादी मिलने से रही.
    9. सन् 1939 के कांग्रेस सम्मेलन में नेताजी स्ट्रेचर पर लाद कर लाए गए. यहां उन्हें गांधीजी की ओर से प्रस्तावित अध्यक्ष पद हेतु पट्टाभि सीतारमैया से अधिक समर्थन मिला और उन्हें दोबारा अध्यक्ष पद पर चुन लिया गया.
    10. नेताजी के मृत्यु की आज भी पुष्टि नहीं हो पायी है. उनकी ज़िंदगी के कई साक्ष्य और बातें रूस और भारत में देखे-सुने गए हैं.
    11. नेताजी का ऐसा मानना था कि अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए सशक्त क्रांति की आवश्यकता है, तो वहीं गांधी अहिंसक आंदोलन में विश्वास करते हैं.
    12. जलियांवाला बाग हत्याकांड ने उन्हें इस कदर विचलित कर दिया कि, वे भारत की आज़ादी के संग्राम में कूद पड़े.
    13. नेताजी सुभाष चंद्र बोस उनके परिवार में 9 वें नंबर के बच्चे थे.
    14. नेताजी उनके बचपन के दिनों से ही एक विलक्षण छात्र थे, और राष्ट्रप्रेमी भी.
    15.भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में नेताजी की रैंक 4 थी.
    16. नेताजी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दो बार अध्यक्ष चुना गया था.
    17. नेताजी के मौत की गुत्थी आज भी अनसुलझी है, और यहां तक कि भारत सरकार भी उनकी मौत के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहती.
    18. लोगों का ऐसा मानना है कि नेताजी सन् 1985 तक जीवित रहे हैं, जहां वे भगवानजी के रूप में फैज़ाबाद के एक मंदिर में रहते थे.
    19. नेताजी के कॉलेज के दिनों की बात है. एक अंग्रेजी शिक्षक के भारतीयों को लेकर आपत्तिजनक बयान पर उन्होंने ख़ासा विरोध किया, जिसकी वजह से उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया.
    20. महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बीच गहरे मतभेद थे. मामला यहां तक पहुंच गया था कि गांधीजी द्वारा कांग्रेस पार्टी के प्रस्तावित अध्यक्ष पदीय प्रत्याशी को हरा दिया. हालांकि नेताजी अध्यक्ष पद का चुनाव जीत चुके थे, मगर फिर भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
    21. कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद नेताजी ने सन् 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक नामक संगठन का गठन किया.
    22. ऐसा माना जाता है कि नेताजी की मौत जापान में किसी हवाई दुर्घटना में हुई थी, मगर अब तक नेताजी के शरीर के कोई भी अवशेष कहीं से भी बरामद नहीं हुए हैं.
    23. 17 मई, 2006 को जस्टिस मुखर्जी कमीशन ने एक रिपोर्ट पेश की, “जिसमें इस बात का जिक्र था कि रंकजी मंदिर में पाई जाने वाली राख नेताजी की नहीं थी” . हालांकि इस रिपोर्ट को भारत सरकार द्वारा ठुकरा दिया गया, और यह मामला आज भी एक रहस्य ही है.

इंडियन रेलवे के बारे में 20 ऐसी ग़ज़ब जानकारियां जिसे हर किसी को जानना चाहिए


इंडियन रेलवे के बारे में 20 ऐसी ग़ज़ब जानकारियां जिसे हर किसी को जानना चाहिए

  • अंग्रेजी, डाक और क्रिकेट के बाद यदि कोई एक चीज़ जिसके लिए हमें अंग्रेजों का शुक्रगुजार होना चाहिए, तो वह इंडियन रेलवे और उसका बिछा हुआ जाल है. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और असाम से रामेश्वरम तक, हर जगह रेल का जाल बिछा हुआ है. और आज भी मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग का पसंदीदा यातायात रेल ही है. तो यहां पेश हैं इंडियन रेलवे के बारे में 20 ऐसे तथ्य जो आपको अवश्य पता होने चाहिए.

    1. इंडिया में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को बांबे से थाने के बीच चली थी.

    2. इंडियन रेलवे का शुभंकर प्रतीक भोलु है- द गार्ड एलिफैंट.


    3. इंडियन रेलवे के ट्रैक की पूरी लंबाई इक्वेटर के लगभग डेढ़ चक्कर लगा सकती है.

    4. पहला रेलरोड दो भारतीयों द्वारा बनाया गया था. उनका नाम जगन्नाथ शुंकरसेठ और जमशेतजी जीजीभाई था.


    5. मेटुपलयम् ऊटी निलगिरी पैसेंजर ट्रेन इंडिया में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है. यह 10 कि.मी. प्रति घंटे की रफ़्तार से चलती है.

    6. पूरे दिन भर में जितना सफ़र इंडियन रेलवे तय करती है, वह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का साढ़े तीन गुना है.

    7. एक करोड़ साठ लाख कर्मचारियों के साथ इंडियन रेलवे दुनिया की 9वीं सबसे बड़ी रोजगार देने वाली संस्था है.

    8. इंडियन रेलवे एकाधिकृत है. इस पर भारत सरकार का एकाधिकार है.

    9. हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस के 115 स्टॉप्स हैं. जो किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन का अधिकतम रिकॉर्ड है.

    10. इंडियन रेलवे प्रति दिन लगभग 2.5 करोड़ लोगों को ढोती है, जो पूरे ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या से भी अधिक हैं.

    11. इंडियन रेलवे का पहला कम्प्यूटरीकृत रिजर्वेशन काउंटर सन् 1986 में दिल्ली में खुला था.

    12. नई दिल्ली के मुख्य स्टेशन पर पूरी दुनिया का सबसे बड़ा रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम है, जो इसे गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करवाता है.

    13. 1366.33 मीटर की लंबाई वाला प्लेटफॉर्म गोरखपुर (उत्तरप्रदेश) में है, जो इसे पूरी दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बनाता है.

    14. इंडियन रेलवे पूरी दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है. 1,15,000 कि.मी. का ट्रैक और 65,000 कि.मी. का रूट है.

    15. “वेंकटनरसिंम्हराजवारिपटा” सबसे बड़ा स्टेशन का नाम है.

    16. गुवाहाटी-त्रिवेन्द्रम एक्सप्रेस हमारे देश में चलने वाली सबसे अनिश्चित और गैरविश्वासी ट्रेन है. इस ट्रेन की औसत देरी 10 से 12 घंटे है.

    17. दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल चिनाब नदी पर बनाया जा रहा है. ये ख़ुद के सामने एफिल टॉवर को भी बौना साबित कर देगा.

    18. इंडिया में रेलवे स्टेशन्स की संख्या 7,500 है.

    19. रेलवे के चलन के लगभग 50 वर्षों तक रेलवे में टॉयलेट की कोई सुविधा नहीं थी.

    20. 2014 में इंडियन रेलवे ने एक मोबाइल ऐप सिस्टम जारी किया है. जिसके माध्यम से आप ट्रेनों के तय टाइमिंग को जान सकते हैं.

ये 16 तथ्य साबित करते हैं कि महाभारत काल्पनिक नहीं, सत्य था


ये 16 तथ्य साबित करते हैं कि महाभारत काल्पनिक नहीं, सत्य था

  • धर्म और आस्था एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जहां धर्म की बात होती है वहां आस्था खुद-ब-खुद आ जाती है. हिन्दुओं के सबसे बड़े ग्रंथ महाभारत के साथ भी कुछ ऐसा ही है. श्री कृष्ण भगवान और गीता भी इसी से जुड़े हैं. गीता में लिखे शब्दों को हिन्दू धर्म का मार्ग दर्शक कहा जाता है और महाभारत को धर्म और अधर्म के बीच हुआ सबसे बड़ा युद्ध. उस वक्त के मिले कुछ प्रमाण ये साबित भी करते हैं कि श्री कृष्ण ने इस धरती पर जन्म लिया था और महाभारत का युद्ध भी हुआ था.

    1. इतिहास

    महाभारत को भारत का इतिहास कहा जाता है. इतिहास का मतलब होता है जो घटित हुआ हो. अगर ये कोई काल्पनिक घटना होती तो इसे लिखने वाले इसे महाकाव्य के बजाए कथा कहते, न कि इसे घटित घटना कहा जाता.

    2. राज-वंश

    महाभारत कथा की शुरुआत राजा 'मनु' से होती है और इस वंश के 50 से ज़्यादा राजाओं के किस्से इसमें लिखे हैं. राजा पांडु और धृत्रराष्ट भी इसी वंश के थे. अगर ये कोई काल्पनिक घटना होती तो इसके लेखक पूरे वंश के बारे में लिखने के बजाए सिर्फ 5 या 10 राजाओं के बारे में लिखते.

    3. कलयुग का सच

    कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश महाभारत युद्ध के दौरान दिया था, जिसमे कलयुग (जिसे आज का वक़्त कहा जाता है) का सारा बखान है. आज जो घटित हो रहा है वो गीता में पहले से लिखा है, ये कोई काल्पनिक घटना नहीं हो सकती.

    4. द्वारका शहर

    श्री कृष्ण द्वारका के राजा थे और महाभारत के अनुसार ये शहर जलमग्न हो गया था. पुरातत्व विभाग को गुजरात के पास समुद्र के नीचे एक पूरा शहर मिला है जिसे महाभारत काल का ही बताया जा रहा है. भगवान श्री कृष्ण की नगरी को एक समपर्ण राज बताया जाता था. द्वारका के बारे में कहा जाता है कि वहां रहने वालों को छोड़ कर समुद्र ने इस पूरे शहर को अपने अंदर समा लिया था. समुद्र में मिले अवषेश ये साबित करते हैं कि वो शहर श्री कृष्ण का द्वारका ही है.

    5. आज के शहर तब के देश

    महाभारत में भारत के 35 से ज़्यादा शहरों के बारे में लिखा है जो आज भी हमारे बीच हैं. पुरातत्व विभाग को इस बात के कई प्रमाण भी मिले हैं. भारत और उसके आस-पास के कई देशों का महाभारत में विवरण है. हस्तीनापुर आज उत्तर प्रदेश राज्य का मेरठ जिला है, वहीं गांधार आज अफ़गानिस्तान का शहर कांधार है, साथ ही इन्द्रप्रस्थ आज भारत की राजधानी दिल्ली है, श्री कृष्ण का द्वारका भी आज गुजरात राज्य का एक शहर है.

    6. रामायण और महाभारत में समानता

    रामायण और महाभारत दो अलग-अलग वक़्त में दो अलग-अगल लोगों द्वारा लिखी गई है और दोनों किताबों में लिखी गई बात के कई प्रमाण मिले हैं. अगर ये किताबें काल्पनिक होतीं तो इन दोनों किताबों में इतनी समानता नहीं होतीं.

    7. श्री कृष्ण का वंश

    इतिहास के पन्नों में चंद्रगुप्त मौर्य के बारे में लिखा गया है. कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य भगवान कृष्ण वंश के 138वें राजा थे. चंद्रगुप्त मौर्य के होने की सच्चाई तो सब मानते हैं ऐसे में श्री कृष्ण के होने का ये भी एक प्रमाण है.
    Source: upload

    8. भारत देश

    दुष्यंत और शकुंतला के बेटे भरत के नाम पर भारत देश का नाम पड़ा और भरत के वंश का विवरण महाभारत में है. पांडु और धृतराष्ट इन्हीं के वंशज हैं. भारत देश का होना ही महाभारत का सबसे बड़ा प्रमाण है.

    9. छंद में लिखी महाभारत

    ये बोलना कि महाभारत कोई काल्पनिक घटना है बिलकुल गलत होगा, क्योंकि इसमे लिखी हर प्रथा सही है. यहां तक कि इसमे लिखे गणित के सिद्धांत भी काव्य के रूप में हैं, जो शत-प्रतिशत सही हैं.

    10. अलिखित तथ्य

    पुराणों में मौर्य काल का विवरण है साथ ही ग्रीस के इतिहास का भी विवरण पुराणों में लिखा है, जो सच है. महाभारत के बारे में भी इन पुराणों में लिखा है जो इसके होने का प्रमाण देते हैं.

    11. महाभारत काल में परमाणु बम का विवरण

    कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में कई शक्तिशाली हथियारों का प्रयोग हुआ था, जिसमे परमाणु बम भी थे. इन हथियारों में ब्रहमांड की ताकत थी और धरती के खात्मे की क्षमता. पहले संस्कृत के विद्वानों को ये बात समझ नहीं आई थी, लोकिन जापान पर हुए परमाणु हमले ने इस बात का भी राज़ खोल दिया.

    12. विद्वानों ने भी माना

    पहले परमाणु बम का इस्तेमाल करने वाले Oppenheimer से जब एक छात्र ने पूछा कि आपको पहला परमाणु बम इस्तेमाल कर के कैसा लगा तो उन्होंने बोला कि 'आज के समय का पहला परमाणु बम इस्तेमाल करना अच्छा था'. Oppenheimer भी ये मानते थे कि महाभारत काल में भारत के पास ये शक्ति थी.

    13. जरासंध का अखाड़ा

    महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र जरासंध थे, जिसका वध भीम के हाथों हुआ था. जरासंध मगध देश का राजा थे. पुरातत्व विभाग को बिहार के एक जिले राजगीर में जरासंध का अखाड़ा मिला है, जहां भीम ने उसे मौत के घाट उतारा था. आज पर्यटकों के बीच ये आकर्षण का केंद्र है.
    Source: subhumi

    14. अंग देश

    कुंती के सबसे बड़े पुत्र कर्ण अंग देश के राजा थे, जिसे तोहफ़े के रूप में दुर्योधन ने कर्ण को दिया था. उस वक्त का अंग देश आज के उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला है. साथ ही जरासंध द्वारा भी कर्ण को तोहफ़े के रूप में अपने राज्य के कुछ हिस्से देने की बात कही गई है, जो आज बिहार का मुंगेर और भागलपुर जिला है.
    Source: ajabgjab

    15. घटोत्कच का शरीर

    पुरातत्व विभाग को कुरूक्षेत्र के पास महाभारत काल का एक बहुत बड़ा कंकाल मिला है, जिसे घटोत्कच का कंकाल कहा जा रहा है. घटोत्कच, भीम और हिडिम्बा के पुत्र थे. महाभारत में घटोत्कच के आकार का वही विवरण है जिस आकार का पुरातत्व विभाग को कंकाल मिला है.

    16. कुरुक्षेत्र

    महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था. हरियाणा के इस जिले में वो मैदान आज भी है जहां ये युद्ध हुआ था. कहा जाता है कि युद्ध में बहे खून की वजह से यहां की मिट्टी का रंग लाल हुआ था. आज भी वहां की मिट्टी का रंग लाल है.

Monday, 14 September 2015

ये हैं दुनिया की 10 शक्तिशाली आर्म्ड फोर्सेज़


ये हैं दुनिया की 10 शक्तिशाली आर्म्ड फोर्सेज़

  • हर देश की जान उस देश की सेना होती है. सेना उसे मजबूत बनाती है. सेना के जवान सीमा पर खड़े-खड़े देशवासियों की रक्षा के लिए अपना सीना ताने रखते हैं. देश पर अगर कोई समस्या आती है तो सबसे पहले सेना का जवान ही उसका सामना करता है. आज “World Military Day” है. सबसे पहले हर सैनिक को हमारा सलाम. और हम यही दुआ करते हैं कि इनके विचारों से प्रेरित होकर लोग अपने देश की रक्षा करते रहें.
    इस आर्टिकल में आज हम विश्व की ऐसी सेनाओं की बात करेंगे जो सबसे शक्तिशाली हैं.

    1.युनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका

    विश्व का सबसे अमीर देश अमेरिका अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अपने रक्षा बजट पर लगाता है. इसकी सेना में लगभग 1,369,532 लोग लगातार देश की रक्षा कर रहे हैं.
    Source: wikipedia

    2. रूस

    पिछले दो दशकों से तकनीक के मामले में रूस ने अपनी अच्छी पकड़ बना ली है. रूस ने अपनी सेना को मजबूत बनाने के लिए विज्ञान की सहायता लेनी सबसे पहले शुरू की थी. आज रूस की रक्षा करने के लिए लगभग 766,000 सैनिक तैनात हैं.

    3. चीन

    लोगों का कहना है कि चीन की सेना सबसे शक्तिशाली है. पर दोस्त, ऐसा नहीं है! वैसे ये सब नंबरों का खेल है. चीन की जनसंख्या ज़्यादा होने की वजह से ऐसा कहा जाता है. चीन के पास “मैन पॉवर” सबसे ज़्यादा है. चीन की सेना में लगभग 2,285,000 सैनिक काम कर रहे हैं. चीन सरकार लगातार देश का रक्षा बजट बड़ा रही है. इससे चीन के पड़ोसियों को चिंतित होने की ज़रूरत है.

    4. भारत

    भारत ने ख़ुद में बहुत से सुधार किये हैं. आज़ादी के बाद से भारतीय सेना ने बहुत तेज़ी पकड़ी है. बजट से लेकर सेना में लोगों की भागीदारी तक सब में बढ़ोतरी हुई है. भारत जनसंख्या के मामले में दूसरे नंबर पर आता है. तकनीक की सहायता से भारतीय सेना ने बड़े-बड़े आयाम स्थापित किये हैं. भारतीय सेना में लगभग 1,325,000 लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
    source: wikipedia

    5. द युनाइटेड किंगडम

    लगभग पूरी दुनिया पर राज कर चुकी ब्रिटिश सेना आज पांचवे नंबर पर आ चुकी है. वैसे इसका कारण व्यवस्थायें हैं. ब्रिटिश सेना में फ़िलहाल 198,810 लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

    6. फ्रांस

    सन 2013 में फ्रांस ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कदम उठाये. फ्रांस ने अपनी सेना में न्यूक्लिर को काफ़ी महत्व दिया है. फ्रांस की सेना में 222,215 लोग काम कर रहे हैं.
    source: wikipedia

    7. जर्मनी

    माना कि अर्थव्यवस्था के मामले में जर्मनी की हालत दूसरे मुल्कों के मुकाबले ठीक नहीं है, लेकिन वहां की सेना आज भी मुकाबले में टिकी पड़ी है. फ़िलहाल जर्मनी में 182,620 सैनिक हैं.
    Source: breitbart

    8. तुर्की

    फ़िलहाल तुर्की के हाल खस्ताहाल हैं. देश की सेना लगातार आईएस (आतंकी संगठन) से दो-दो हाथ करने में लगी हुई है. तुर्की ने अपनी सेना संगठनों में बहुत से बदलाव किए हैं. तुर्की का मतभेद पड़ोसी देश सीरिया से लगातार चल रहा है. तुर्की ने अपनी सेना के बजट में भी 10 प्रतिशत तक का इज़ाफा किया है. तुर्की की सेना में 664,049 लोग हैं.
    Source: asbarez

    9. साउथ कोरिया

    आंतरिक दिक्कतों के चलते साउथ कोरिया के हालात थोड़े ठीक नहीं चल रहे, हालांकि नॉर्थ कोरिया के साथ भी मामला बिगड़ता-सा जा रहा है. साउथ कोरिया के संबंध नॉर्थ कोरिया के साथ ही नहीं बल्कि जापान और चीन के साथ भी लगातार खराब होते जा रहे हैं. पिछले साल इसने रक्षा बजट को बढ़ा दिया था, आपको जान कर हैरानी होगी कि इस देश की एयर फोर्स विश्व में छठे स्थान पर है. तकनीक के मामले में भी यहां की सेना ने महारथ हासिल कर रखी है. 
    source: universe

    10. जापान

    ये तो आप जानते ही हैं कि जापान अपनी आर्मी के लिए नहीं बल्कि अपनी तकनीक के लिए जाना जाता है. जापान के मतभेद चीन के साथ एक लंबे अरसे से चल रहे हैं. जापान की सेना को हल्के में नहीं लिया जा सकता. जापान की सेना ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार बदलाव किये हैं. आये दिन निकल रही नई-नई तकनीकों के बाद ये विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब होती है.
    Source: usarpac
    हमारा मकसद इन देशों की शक्ति को कम आंकने या ज़्यादा आंकने का नहीं है. "हम हर सैनिक की इज़्ज़त करते हैं और हर देश को सलाम".

“कारगिल युद्ध” की ऐसी दुर्लभ तस्वीरें जो भारतीय सेना के अदम्य साहस की निशानी हैं


“कारगिल युद्ध” की ऐसी दुर्लभ तस्वीरें जो भारतीय सेना के अदम्य साहस की निशानी हैं

सन् 1999 से अब-तक गंगा में बहुत पानी बह चुका है. सन् 1999 की गर्मियों के दौरान कारगिल हम-सभी भारतवासियों के लिए संघर्ष और जिजीविषा का प्रतीक बन कर उभरा था. जब पाकिस्तानी सेना ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन करते हुए कारगिल ग्लेशियर पर कब्ज़ा कर लिया था. और उस का मुंह-तोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना के रणबांकुरों ने अपनी जानें तक आहुत कर दीं, मगर भारत की अस्मिता पर आंच तक न आने दी. 
वैसे तो दुनिया के अलग-अलग देशों ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए न जाने कितनी जंगें लड़ीं हैं. मगर ये जंग दूसरों पर हमले के बजाय भारत की अस्मिता और स्वाभिमान की जंग थी जिसे हमारी पीढ़ी ने पहली बार टेलीविजन पर देखा था, जिसे देख-सुन कर हमारे शरीर में झुरझुरी पैदा हो जाया करती थी. 
तो “कारगिल विजय दिवस” 26 जुलाई के विशेष मौके पर हम ख़ास आपके लिए लेकर आए हैं, सन् 1999 के जंगे-मैदान की कुछ अनदेखी और दुर्लभ तस्वीरें जो भारतीय सेना के संघर्ष की कहानी बयां करती हैं.

जब भारत के रणबांकुरे मातृभूमि की रक्षा हेतु अपना घर-बार छोड़ नकल पड़े

और फ़िर जब हमारे जांबाज़ों ने दुश्मनोंं पर ताबड़तोड़ हमले किए

जब अमूमन शांत रहने वाली घाटी गोले-बारूदों से थर्रा उठी

हमारे जवानों के जज़्बे को संसाधनों की कमी भी डिगा न सकी

और इसके परिणामस्वरूप कारगिल का ज़र्रा-ज़र्रा वंदे मातरम् के नारे से गूंजने लगा

All the images are sourced from funonthenet
हम यह भी जानते हैं कि कोई भी जंग सिर्फ़ हथियारों के दम पर नहीं लड़ा जाता. जंग लड़ा जाता है राष्ट्रप्रेम, साहस, बलिदान व कर्तव्य की भावना से और हमारे देश में इन जज़्बों से भरे युवाओं की कमी नहीं है. 
मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर उनकी यादें सदा हमारे दिलों में बसी रहेंगी.
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा”